बदलता छत्तीसगढ़।रायगढ़।
शक्ति जिले के डभरा थाना क्षेत्र स्थित सिंघीतराई का वेदांता एथेना पावर प्लांट अब एक भयावह औद्योगिक त्रासदी का प्रतीक बन चुका है। इस दिल दहला देने वाले हादसे में अब तक 14 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि आधा दर्जन से अधिक श्रमिक गंभीर हालत में अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं।
मृतकों में 12 मजदूर पश्चिम बंगाल के बताए जा रहे हैं, जबकि 2 श्रमिक छत्तीसगढ़ के हैं। दूर दराज से रोजी रोटी की तलाश में आए इन मजदूरों के लिए यह प्लांट अब मौत का मैदान साबित हुआ है। अस्पतालों में भर्ती घायलों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है और हर गुजरते पल के साथ परिजनों की सांसें अटकी हुई हैं।
हादसे के बाद सरकार हरकत में आई है और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। मृतकों के परिजनों को प्रदेश सरकार की ओर से 5 लाख रुपये और कंपनी की ओर से 35 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की गई है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इन पैसों से उन जिंदगियों की भरपाई हो सकती है जो लापरवाही की भेंट चढ़ गईं।
यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं बल्कि औद्योगिक सुरक्षा की बड़ी विफलता की कहानी बयान कर रहा है। जिस तरह से बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम के मजदूरों से काम लिया जा रहा था, वह अब इस त्रासदी के रूप में सामने आ गया है। चंद मुनाफे के लिए श्रमिकों की जान को दांव पर लगाने की यह कीमत अब मासूम परिवारों को चुकानी पड़ रही है।
सिंघीतराई में पसरा सन्नाटा, अस्पतालों में गूंजती कराह और परिजनों की आंखों में तैरता दर्द इस बात का गवाह है कि यह हादसा सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि कई उजड़े घरों की दर्दनाक कहानी है।
अब पूरे प्रदेश की नजर जांच पर टिकी है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कब तक ऐसे हादसे होते रहेंगे और कब तक मजदूरों की जिंदगी यूं ही सस्ती बनी