खरसिया। गर्मी ने अभी पूरी तरह दस्तक भी नहीं दी है, लेकिन प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खुलने लगी है। खरसिया तहसील परिसर इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रहा है। हालत यह है कि पिछले 7 दिनों से पीने के पानी की व्यवस्था पूरी तरह ठप है और कर्मचारी, अधिवक्ता व ग्रामीण पानी के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।
तहसील परिसर में लगा पुराना बोरवेल पूरी तरह फेल हो चुका है, जबकि नया बोर खुदवाने के बावजूद उसमें भी पानी नहीं निकल पाया। ऐसे में पूरे परिसर में पानी की एक बूंद के लिए हाहाकार मचा हुआ है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं कर पाए हैं।
हर दिन हजारों लोग आते हैं, पानी की व्यवस्था शून्य
खरसिया तहसील परिसर में एसडीएम कार्यालय, तहसीलदार कार्यालय, नायब तहसीलदार कार्यालय, महिला एवं बाल विकास विभाग, विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय और जनपद पंचायत कार्यालय सहित कई अहम शासकीय कार्यालय संचालित होते हैं।
इन दफ्तरों में रोजाना सैकड़ों कर्मचारी और हजारों ग्रामीण, अधिवक्ता व पक्षकार अपने जरूरी काम लेकर पहुंचते हैं। लेकिन परिसर में पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं होने से लोग भारी परेशानी झेल रहे हैं। कई लोगों को मजबूरी में बाहर से पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है।
मार्च में ही ये हाल… तो मई-जून में क्या होगा?
स्थानीय कर्मचारियों और लोगों का कहना है कि मार्च की शुरुआत में ही तहसील परिसर में पानी खत्म हो गया है, तो आने वाले मई-जून की भीषण गर्मी में हालात कितने भयावह होंगे, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
लोगों का आरोप है कि समस्या कई दिनों से बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ औपचारिकता निभा रहे हैं।
प्रशासन की सुस्ती से बढ़ रहा आक्रोश
तहसील परिसर में रोजाना आने वाले लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही नया बोर, पानी टैंकर या स्थायी जल व्यवस्था नहीं की गई तो स्थिति और विस्फोटक हो सकती है।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था कर परिसर में पानी उपलब्ध कराया जाए, अन्यथा आने वाले दिनों में कर्मचारियों और अधिवक्ताओं का आक्रोश सड़कों पर भी उतर सकता है।
फिलहाल बड़ा सवाल यही है
जब प्रशासनिक तंत्र का केंद्र ही पानी के लिए तरस रहा है, तो आम जनता की समस्याओं का समाधान कैसे होगा?