बदलता छत्तीसगढ़।रायगढ़
रायगढ़ शहर में सड़क सुरक्षा अब सवाल नहीं बल्कि चीख बन चुकी है। मुख्य मार्ग हो, चौक चौराहा हो या व्यस्त तिराहा, बेलगाम रफ्तार से दौड़ते भारी वाहनों ने आम लोगों की जिंदगी को रोजाना दांव पर लगा दिया है। रविवार सुबह हादसों की इस लंबी श्रृंखला में एक और दर्दनाक अध्याय जुड़ गया, जब स्कूटी से अपने दादा के साथ सरकारी दुकान से चावल लेकर लौट रही 15 वर्षीय किशोरी की ट्रेलर की ठोकर से मौत हो गई।
यह हृदयविदारक घटना शहर के बदनाम हो चुके सीएमओ तिराहा चौक के पास हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार किशोरी अपने दादा के साथ स्कूटी में बैठकर भगवानपुर स्थित सरकारी राशन दुकान से चावल लेकर लौट रही थी। जैसे ही वे सीएमओ तिराहा के समीप पहुंचे, तेज रफ्तार ट्रेलर ने स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयावह थी कि किशोरी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दादा सदमे में बेसुध हो गए।
बताया जा रहा है कि मृतक किशोरी का परिवार कृष्णापुर क्षेत्र में निवास करता है, लेकिन उनका राशन कार्ड भगवानपुर की सरकारी दुकान से जुड़ा हुआ है। इसी वजह से दादा अपनी पोती को साथ लेकर राशन लेने गए थे। किसे पता था कि घर लौटते समय यह सफर जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा।
सीएमओ तिराहा का काला इतिहास
जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, वही चौक लगभग 15 वर्ष पहले भी एक स्कूली बच्चे की मौत का गवाह बन चुका है। उस समय शहरभर में जबरदस्त आक्रोश फूटा था। गुस्साई भीड़ ने दर्जनों वाहनों में तोड़फोड़ की थी और कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया था। प्रशासन ने तब सुरक्षा सुधार, यातायात नियंत्रण और भारी वाहनों पर लगाम लगाने के बड़े-बड़े दावे किए थे।
लेकिन वर्षों बाद तस्वीर नहीं बदली। चौक आज भी अव्यवस्थित है, यातायात नियंत्रण कमजोर है और भारी वाहन बेखौफ रफ्तार भरते नजर आते हैं। नतीजा यह हुआ कि एक और मासूम जिंदगी सड़क पर कुचल गई।
हादसे के बाद फूटा गुस्सा
घटना के बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। आक्रोशित नागरिकों ने मुआवजे, दोषी चालक पर कठोर कार्रवाई और चौक पर स्थायी सुरक्षा इंतजाम की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। खबर लिखे जाने तक प्रदर्शन जारी था और माहौल तनावपूर्ण बना हुआ था।
सवालों के घेरे में प्रशासन
कितनी मौतों के बाद चेतेगा प्रशासन
कब तक शहर की सड़कों पर भारी वाहन मासूम जिंदगियां निगलते रहेंगे
क्यों नहीं बन पा रही ठोस यातायात व्यवस्था
कब तक हादसे के बाद मुआवजे की घोषणा ही समाधान मानी जाएगी
रायगढ़ आज फिर रो रहा है। एक परिवार की दुनिया उजड़ गई, लेकिन सवाल वही पुराना है क्या अगली मौत तक सब कुछ फिर सामान्य मान लिया जाएगा।