
बदलता छत्तीसगढ़।रायगढ़।
भूपदेवपुर क्षेत्र के सिंघनपुर में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उमा राठिया की मौत के बाद अब जो बातें सामने आ रही हैं, उन्होंने इस हादसे को और भी दर्दनाक बना दिया है। यह मामला अब केवल सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि संवेदनहीन व्यवस्था, मानसिक दबाव और एक परिवार के उजड़ने की कहानी बन गया है।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह महिला एवं बाल विकास विभाग की सेक्टर पर्यवेक्षक आकस्मिक निरीक्षण के लिए सिंघनपुर आंगनबाड़ी केंद्र पहुंची थीं। वहां कार्यकर्ता उमा राठिया के नहीं मिलने पर उन्होंने मोबाइल पर कॉल किया। बताया जा रहा है कि सुबह करीब 9 बजे फोन आया था और लगभग 35 से 40 सेकेंड तक बातचीत हुई। इस दौरान ड्यूटी पर नहीं पहुंचने को लेकर फटकार लगाई गई।
सूत्रों के अनुसार, इसी फोन कॉल के बाद उमा राठिया घबराहट और दबाव में जल्दबाजी से घर से निकलीं। गर्भवती होने के बावजूद वह अपने पति और बच्चे के साथ स्कूटी से सिंघनपुर के लिए रवाना हुईं। लेकिन सुबह 9 बजकर 15 मिनट के आसपास गांव पहुंचने से पहले कोयला लोड ट्रक ने स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में उमा राठिया की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पति और बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गए।
लेकिन इस हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू वह था जिसने पूरे क्षेत्र को हिला दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दुर्घटना के बाद मृतका के गर्भ में पल रहा शिशु भी बाहर आ गया था। लोगों का कहना है कि उस मासूम में हलचल दिखाई दे रही थी। जिसने भी यह दृश्य देखा, उसकी आंखें नम हो गईं और रोंगटे खड़े हो गए।
लोगों का कहना है कि इस हादसे में सिर्फ एक महिला की जान नहीं गई, बल्कि उसके गर्भ में पल रही नन्ही जिंदगी भी बुझ गई। यही कारण है कि क्षेत्र में लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या एक गर्भवती महिला कर्मचारी पर ड्यूटी को लेकर इतना दबाव बनाना जरूरी था। क्या सख्ती और प्रेशर ने दो जिंदगियां छीन लीं। क्या इस हादसे की जिम्मेदारी केवल ट्रक चालक की है या उस व्यवस्था की भी, जिसने एक महिला को मजबूरी में हड़बड़ी में निकलने पर मजबूर कर दिया।
सिंघनपुर हादसा अब सड़क दुर्घटना से कहीं बड़ा मामला बन चुका है। लोग निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय की मांग कर रहे हैं।