



बदलता छत्तीसगढ़। सक्ती। वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। यह हादसा अब सिर्फ औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि मजदूर सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक जवाबतलब का बड़ा मुद्दा बन चुका है। अब तक 20 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि तीन दर्जन से अधिक मजदूर गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। कई घायलों का इलाज निजी और सरकारी अस्पतालों में जारी है।
हादसे के बाद प्रदेश की राजनीति में उबाल आ गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों लगातार घटनास्थल और अस्पतालों का दौरा कर रहे हैं। एक तरफ कांग्रेस का बड़ा प्रतिनिधिमंडल प्लांट पहुंचा, तो दूसरी ओर विष्णु सरकार के उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन अस्पतालों में भर्ती घायलों का हालचाल लेते नजर आए।
कांग्रेस का बड़ा हमला, प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज पहुंचे घटनास्थल
गुरुवार को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ चरण दास महंत और जैजैपुर विधायक बालेश्वर साहू की अगुवाई में कांग्रेस विधायक दल वेदांता प्लांट पहुंचा। उनके साथ अकलतरा विधायक राघवेंद्र सिंह, जांजगीर विधायक व्यास कश्यप, चंद्रपुर विधायक रामकुमार यादव और सारंगढ़ विधायक उत्तरी जांगड़े भी मौजूद रहे।
प्रतिनिधिमंडल ने प्लांट परिसर का निरीक्षण किया और हादसे की स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के बाद कांग्रेस नेताओं ने सीधे तौर पर प्लांट प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया।
दीपक बैज ने कहा कि घटनास्थल देखकर साफ है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई, जिसका परिणाम यह दर्दनाक हादसा है। मजदूरों की जान से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
कांग्रेस की चार बड़ी मांगें
हादसे के बाद कांग्रेस ने राज्य सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखीं
सभी मजदूरों की सुरक्षा तत्काल सुनिश्चित की जाए
मृतक और घायल मजदूरों के परिवारों को न्याय मिले
दोषी अधिकारियों और प्लांट प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई हो
पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए
उद्योग मंत्री भी मैदान में
दूसरी ओर राज्य सरकार की ओर से उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन अस्पतालों में भर्ती घायलों से मिलने पहुंचे। उन्होंने डॉक्टरों से इलाज की जानकारी ली और बेहतर उपचार के निर्देश दिए। सरकार की ओर से राहत और जांच की प्रक्रिया जारी होने की बात कही गई।
देशभर में उठे सवाल
इस हादसे ने पूरे देश में कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या बड़े उद्योगों में मजदूरों की सुरक्षा सिर्फ कागजों तक सीमित है। क्या उत्पादन के दबाव में सुरक्षा नियमों को नजरअंदाज किया जा रहा है। आखिर इतनी बड़ी त्रासदी के लिए जिम्मेदार कौन है।
शोक, गुस्सा और इंतजार
20 परिवारों के घरों के चिराग बुझ चुके हैं। कई मजदूर जिंदगी और मौत के बीच अस्पतालों में जूझ रहे हैं। परिजनों की आंखों में आंसू हैं, मजदूरों में गुस्सा है और पूरे प्रदेश को अब सिर्फ एक चीज का इंतजार है, दोषियों पर कार्रवाई का।