
बदलता छत्तीसगढ़।रायगढ़।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर न्यूज़ बदलता छत्तीसगढ़ आपको ऐसी प्रेरणादायक महिलाओं से रूबरू कराने जा रहा है, जिन्होंने अपनी शिक्षा, मेहनत और काबिलियत के दम पर न केवल रूढ़िवादी सोच को चुनौती दी है, बल्कि समाज में महिला शक्ति की नई पहचान भी स्थापित की है।
राज्य के प्रशासनिक तंत्र की रीढ़ माने जाने वाले राजस्व विभाग में कार्यरत ये तीनों महिला अधिकारी आज अपनी कार्यकुशलता, संवेदनशीलता और सख्त प्रशासनिक फैसलों के कारण अलग पहचान बना चुकी हैं। तहसीलदार और नायब तहसीलदार जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए ये अधिकारी सिर्फ दफ्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लगातार फील्ड में उतरकर आम जनता की समस्याओं का समाधान कर रही हैं।
इनकी कार्यशैली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भूमि विवाद, नामांतरण, सीमांकन, राजस्व प्रकरण और जनसमस्याओं जैसे जटिल मामलों में ये अधिकारी त्वरित और सटीक निर्णय लेकर लोगों को राहत पहुंचा रही हैं। कई बार जहां वर्षों से लंबित प्रकरण अटके रहते हैं, वहां इनके हस्तक्षेप से पलक झपकते समाधान निकल आता है।
इन महिला अधिकारियों ने यह साबित कर दिया है कि नारी सिर्फ घर की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं, बल्कि प्रशासन और समाज के हर क्षेत्र में नेतृत्व करने की क्षमता रखती है।
उनकी कार्यकुशलता और निर्णय क्षमता ने न केवल जनता का विश्वास जीता है, बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए भी एक मजबूत प्रेरणा बन गई हैं।
आज जब पूरा विश्व अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मना रहा है, तब ऐसी कर्मठ और समर्पित महिला अधिकारियों की सफलता यह संदेश देती है कि अगर अवसर और आत्मविश्वास मिले तो महिलाएं किसी भी क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू सकती हैं।
ये तीनों अधिकारी आज सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं निभा रहीं, बल्कि नारी सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल बनकर समाज को प्रेरित भी कर रही हैं।
“जमीन से जुड़ी है लोगों की जिंदगी, इसलिए हर फैसला सोच-समझकर” — तहसीलदार अनुराधा पटेल

राजस्व विभाग , यहां लिए गए फैसलों का सीधा संबंध लोगों की जमीन और जिंदगी से होता है। यही वजह है कि हर निर्णय में संवेदनशीलता और गंभीरता जरूरी है।
रायगढ़ जिले के परसकोल गांव की रहने वाली अनुराधा पटेल ने ओपी जेआईटी रायगढ़ से 2013 में मेटलर्जी इंजीनियरिंग की और 2016 में पहले ही प्रयास में पीएससी पास कर प्रशासनिक सेवा में आईं। उनकी पहली पोस्टिंग नायब तहसीलदार के रूप में जशपुर में हुई, इसके बाद जांजगीर और रायगढ़ में सेवाएं देने के बाद खरसिया और अब पुसौर की तहसीलदार के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही हैं। परिवार और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन को लेकर वह कहती हैं कि सामंजस्य और समझदारी से ही जीवन और कर्तव्य दोनों को बेहतर तरीके से निभाया जा सकता है।
“लक्ष्य तय कर लें तो उसे पाने के लिए पूरी ताकत लगा दें” — नायब तहसीलदार मोनल साय

जशपुर की बेटी मोनल साय आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। वर्ष 2019 में सीजी पीएससी में सफलता हासिल कर उन्होंने अपने अदम्य साहस, मेहनत और जुनून से यह साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो तो हर मंजिल हासिल की जा सकती है।
गणित विषय से एमएससी करने वाली मोनल साय की सफलता इसलिए भी खास है, क्योंकि अक्सर शादी के बाद महिलाएं अपने सपनों को पीछे छोड़ देती हैं। लेकिन मोनल ने इसके उलट अपने पति के सहयोग और बड़ी बहन की प्रेरणा से कड़ी मेहनत की और पीएससी के पहले ही प्रयास में नायब तहसीलदार बनकर नई मिसाल कायम कर दी।
उनकी पहली पोस्टिंग कोरिया जिले के बैकुंठपुर में हुई। इसके बाद उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ निभाते हुए अपनी अलग पहचान बनाई।
मोनल साय किसान परिवार से आती हैं। पिता किसान और माता गृहिणी होने के कारण वह किसानों और आम लोगों की समस्याओं को करीब से समझती हैं। यही वजह है कि राजस्व से जुड़े मामलों में वह बारीकी से जांच और वास्तविक स्थिति को समझने के बाद ही निर्णय लेती हैं।
मोनल साय का मानना है कि
“अगर आपने जीवन में कोई लक्ष्य तय कर लिया है तो उसे पाने के लिए पूरी ताकत से जुट जाना चाहिए। परिश्रम और सकारात्मक सोच ही सफलता की असली कुंजी है।”
जशपुर की यह बेटी आज न केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभा रही है, बल्कि अपनी सफलता से नारी सशक्तिकरण और नई पीढ़ी की लड़कियों के लिए प्रेरणा भी बन चुकी है।
“क्षमता है तो मेहनत जरूरी… लक्ष्य डिप्टी कलेक्टर बनना” — नायब तहसीलदार काजल अग्रवाल

2023 बैच की नायब तहसीलदार काजल अग्रवाल प्रशासनिक सेवा में उभरती हुई युवा अधिकारी हैं। वर्ष 1998 में जन्मी काजल मूलतः सारंगढ़ की रहने वाली हैं।व्यापारिक परिवार में पैदा हुई काजल अपने परिवार की पहली सदस्य हैं जिन्होंने सरकारी नौकरी हासिल की। खरसिया में बतौर नायाब तहसीलदार के रूप में प्रशासनिक सेवा की शुरुआत करने वाली काजल बताती हैं कि राजस्व विभाग में काम करने की इच्छा शुरू से ही थी, क्योंकि इस विभाग में लगातार कुछ नया सीखने का अवसर मिलता है। इसलिए अपने दायित्वों को सीखने और समझने में पूरी मेहनत से जुटी हुई है। कोविड काल के दौरान उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की और लगातार मेहनत कर प्रशासनिक सेवा में जगह बनाई।
अपने अनुभव साझा करते हुए काजल कहती हैं कि नगर पालिका चुनाव में सहायक रिटर्निंग अधिकारी के रूप में काम करने और SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) जैसे कार्यों में शामिल होने से उन्हें प्रशासनिक कार्यप्रणाली को करीब से समझने का मौका मिला।
काजल का अगला लक्ष्य सीजी पीएससी में बेहतर रैंक हासिल कर डिप्टी कलेक्टर बनना है। वह मानती हैं कि
“अगर आपके पास क्षमता है तो उसे साबित करने के लिए कड़ी मेहनत भी जरूरी है। आज महिलाओं को हर क्षेत्र में अवसर मिल रहे हैं, बस जरूरत है कि वे फील्ड में उतरकर अपनी मेहनत और प्रतिभा साबित करें।”
युवा नायब तहसीलदार काजल अग्रवाल की यह सोच बताती है कि नई पीढ़ी की महिलाएं अब प्रशासनिक सेवा में न केवल जिम्मेदारियां निभा रही हैं, बल्कि बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस भी रखती हैं।