बदलता छत्तीसगढ़।रायगढ़।
“” नवपदस्थ पुलिस कप्तान शशिमोहन सिंह के पदभार ग्रहण करते ही पुलिस की कार्यशैली में अचानक आक्रामकता नजर आने लगी है।
जहां वर्षों से अपराधी बेखौफ घूम रहे थे, वहीं अब शहर के कोने-कोने में छिपे अपराधियों को उनकी मांद से खींचकर बाहर निकाला जा रहा है।
इतना ही नहीं, वर्षों से खुलेआम संचालित हो रहे देह व्यापार के ठिकानों पर भी एक के बाद एक सिलसिलेवार कार्रवाई की जा रही है। खासकर चक्रधरनगर थाना क्षेत्र के बोईरदादर इलाके में जिस तरह सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है।उससे कई सवाल शहरवासियों के जेहन में कौधने लगे है””
🔴 पीटा एक्ट की कार्रवाई नहीं, पुलिस की 15 साल की नाकामी उजागर
🚨 स्कूल-चर्च के बगल में चलता रहा सेक्स रैकेट, पुलिस रही मौन
शहर में पीटा एक्ट के नाम पर की जा रही कार्रवाई दरअसल पुलिस की 15 साल पुरानी नाकामी पर डाला गया पर्दा बनती नजर आ रही है।
चक्रधरनगर थाना क्षेत्र के बोईरदादर इलाके में एक ही जगह पर पूरे डेढ़ दशक तक देह व्यापार का अड्डा धड़ल्ले से चलता रहा, लेकिन पुलिस को न तो कुछ दिखा, न सुनाई दिया—यह सवाल अब शहर पूछ रहा है।
शालिनी स्कूल और चर्च जैसे अति संवेदनशील स्थल के ठीक बगल में दलाल नारायण वैष्णव खुलेआम सेक्स रैकेट ऑपरेट करता रहा।
दिन-रात बाहरी लड़कियों की आवाजाही, संदिग्ध ग्राहक, किराए के कमरे—सब कुछ सबकी नजरों में था, सिवाय पुलिस के।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि—
👉 क्या 15 साल तक बीट पुलिस, मुखबिर और थाना प्रभारी अंधे बने रहे?
👉 या फिर देह व्यापार पुलिस की जानकारी में, संरक्षण में फलता-फूलता रहा?
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार मौखिक शिकायतें की गईं, लेकिन हर बार मामला दबा दिया गया।
अगर आज अचानक पुलिस को सूचना मिली है, तो अब तक की चुप्पी किसकी मिलीभगत का सबूत है?
अब की गई गिरफ्तारी को “बड़ी सफलता” बताना जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा है।
अगर पुलिस सच में सजग होती, तो डेढ़ दशक तक मासूम लड़कियों का शोषण नहीं होता, और इलाके की सामाजिक छवि बर्बाद नहीं होती।
यह कार्रवाई नहीं, बल्कि सिस्टम की शर्मनाक हार है।
अब सवाल सिर्फ दलाल की गिरफ्तारी का नहीं है—
⚠️ उन पुलिस अधिकारियों का क्या, जिन्होंने 15 साल तक आंखें मूंदे रखीं?
⚠️ क्या उनके खिलाफ भी जांच होगी या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
👉 शहर जानना चाहता है—
क्या यह कार्रवाई अपराध पर चोट है, या पुलिस की नाकामी छिपाने की कोशिश?