



बदलता छत्तीसगढ़।रायगढ़।
कभी सिर दर्द तो कभी बुखार…
कभी दवाइयों के पैसे नहीं, तो कभी अस्पताल तक जाने का साधन नहीं।
ग्रामीण जीवन की इन्हीं मजबूरियों को समझते हुए जेएसडब्ल्यू ने एक संकल्प लिया—
“हमारे अंगीकृत गांवों में कोई भी बीमार इलाज के बिना नहीं रहेगा।”
इसी सोच के साथ जेएसडब्ल्यू अपने सामाजिक उत्तरदायित्व को निभाते हुए गांव-गांव नियमित मेडिकल शिविर लगा रहा है। इन शिविरों में न सिर्फ जरूरतमंद ग्रामीणों की मुफ्त जांच की जा रही है, बल्कि मौके पर ही इलाज और दवाइयां भी बिना किसी शुल्क दी जा रही हैं।
जब डॉक्टर खुद गांव पहुंचते हैं, तो बुजुर्गों के चेहरे पर राहत दिखती है, महिलाओं को भरोसा मिलता है और बच्चों को समय पर इलाज मिल पाता है।
यही वजह है कि आज कुररूभाटा, लोढाझर, रकसापली, सेन्द्रीपली, भूपदेवपुर, बिलासपुर, नहरपाली, तिलाइपाली और सिंघनपुर जैसे गांवों में हर सप्ताह तय दिन मेडिकल शिविर लगते ही लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है।
जेएसडब्ल्यू के अधिकारी संतोष चौहान बताते हैं—
“हमारा मकसद सिर्फ इलाज करना नहीं है, बल्कि बीमारी को जड़ से रोकना है। हम चाहते हैं कि हमारे गांवों में कोई भी व्यक्ति दर्द और परेशानी में अकेला न रहे।”
ग्रामीणों का कहना है कि पहले छोटी बीमारी भी बड़ी परेशानी बन जाती थी, लेकिन अब इलाज गांव के दरवाजे तक पहुंच रहा है। समय पर जांच से कई बीमारियों को गंभीर होने से पहले ही रोका जा रहा है।
सेहत की इस पहल ने गांवों में एक नया भरोसा जगाया है—
भरोसा इस बात का कि अब बीमारी मजबूरी नहीं बनेगी।
जेएसडब्ल्यू की यह पहल साबित कर रही है कि जब नियत साफ हो, तो सेवा खुद रास्ता बना लेती है