Saturday, March 28, 2026
Home शिक्षा 112 सेवा ठप,इमरजेंसी सिस्टम ध्वस्त…जिले में डॉयल 112 अघोषित रूप से बंद…आम जनता का हाल बेहाल…आपातकालीन फोन करने पर नही मिल रहा रिस्पांस…

112 सेवा ठप,इमरजेंसी सिस्टम ध्वस्त…जिले में डॉयल 112 अघोषित रूप से बंद…आम जनता का हाल बेहाल…आपातकालीन फोन करने पर नही मिल रहा रिस्पांस…

by Surendra Chauhan


बदलता छत्तीसगढ़।रायगढ़।

एक्के नम्बर सब्बो बर।यह दावा अब सिर्फ फाइलों पर। सरकार की ऐसी नाकामी,न तो देखने को मिलेगी और सुनने। डॉयल 112 सरकारी फाइलों पर न सिर्फ सरपट दौड़ रही है, बल्कि आम आदमी को इमरजेंसी सेवा भी मिल रही है। लेकिन हकीकत इससे उलट है।
हादसा हो, झगड़ा हो या कोई भी आपात स्थिति अब मदद के लिए फोन मिलाने पर सिर्फ निराशा हाथ लग रही है। आम लोगों को तत्काल इमरजेंसी सेवा देने के दावे के साथ शुरू की गई डॉयल 112 सेवा पिछले एक महीने से अघोषित रूप से बंद पड़ी है। पूरे जिले में हालात इतने खराब हैं कि कहीं कर्मचारियों की कमी है तो कहीं वाहन खराब होकर थानों में कबाड़ बनकर खड़े हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह समस्या किसी एक थाना क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे जिले में यही हाल है। ऐसे में आम आदमी को छोटी-बड़ी हर आपात स्थिति में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कभी सरकार की बड़ी उपलब्धि बताई गई यह योजना अब धरातल पर पूरी तरह दम तोड़ चुकी है। शुरुआत में बड़े जोर-शोर के साथ डॉयल 112 को लॉन्च किया गया था और लोगों को तत्काल मदद मिलने लगी थी। लेकिन यह राहत ज्यादा दिन टिक नहीं सकी और कुछ ही समय में यह सेवा धीरे-धीरे पटरी से उतर गई।
जानकारी के मुताबिक इस सेवा के संचालन के लिए एक निजी कंपनी को जिम्मेदारी दी गई थी। तय अवधि तक सब कुछ ठीक चला, लेकिन जैसे ही ठेका खत्म हुआ, पूरी व्यवस्था चरमराने लगी। बीच में ऑपरेटर संघ ने इसे संभालने की कोशिश की, लेकिन संसाधनों की कमी और प्रशासनिक सहयोग के अभाव में वह भी नाकाम रहे।
स्थिति अब इतनी बदतर हो चुकी है कि 24 घंटे ड्यूटी करने वाले ड्राइवरों को पिछले दो महीने से वेतन तक नहीं मिला है। आर्थिक तंगी और अव्यवस्था के चलते कर्मचारी भी काम करने से पीछे हटने लगे हैं।
इमरजेंसी सेवा के नाम पर शुरू की गई यह योजना अब जमीन पर पूरी तरह फेल साबित हो रही है, लेकिन जिम्मेदार सिस्टम अब भी गहरी नींद में है। आम जनता लगातार परेशान है, लेकिन न तो कोई ठोस कदम उठाया जा रहा है और न ही सुधार की कोई कोशिश नजर आ रही है।
बड़ा सवाल यही है कि जब सबसे जरूरी वक्त पर मदद पहुंचाने वाली सेवा ही ठप हो जाए तो जनता आखिर भरोसा करे तो किस पर करे
प्रशासन की चुप्पी और सिस्टम की नाकामी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि योजनाएं कागजों पर जितनी मजबूत दिखती हैं, जमीन पर उतनी ही कमजोर साबित हो रही हैं

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