Monday, March 2, 2026
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“खाकी का करूणामय चेहरा”…जब एडिशनल एसपी अनिल सोनी बने नन्हें शौर्य के “रक्षक”…

by Surendra Chauhan


बदलता छत्तीसगढ़।रायगढ़
कभी-कभी पुलिस की वर्दी सिर्फ कानून की सख्ती नहीं, बल्कि इंसानियत की सबसे कोमल तस्वीर भी बन जाती है। रायगढ़ में रविवार दोपहर ऐसा ही भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जब एडिशनल एसपी अनिल कुमार सोनी ने सड़क पर भटक रहे एक मासूम की जान बचाकर उसे उसकी मां की गोद तक पहुंचा दिया।
दोपहर करीब 3 बजे एडिशनल एसपी अनिल सोनी शहर भ्रमण करते हुए कलेक्ट्रेट में आयोजित बैठक में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान सीएमओ तिराहा के आगे भगवानपुर के पास मुख्य सड़क पर उनकी नजर एक ऐसे दृश्य पर पड़ी जिसने उन्हें तुरंत गाड़ी रुकवाने पर मजबूर कर दिया।
सड़क के बीचों-बीच करीब 2 से ढाई साल का मासूम अपनी छोटी-सी टॉय कार के साथ खेल रहा था। दोनों ओर से तेज रफ्तार में भारी वाहन गुजर रहे थे और हर पल उसकी जिंदगी खतरे में झूल रही थी।
एक पल की सजगता, बच गई मासूम की जान
स्थिति की गंभीरता समझते ही एडिशनल एसपी ने तुरंत वाहन रुकवाया और बिना देर किए खुद सड़क पर उतरकर बच्चे को गोद में उठा लिया। आसपास पूछताछ की गई, लेकिन किसी को भी उस मासूम के परिजनों की जानकारी नहीं थी।
बच्चा ठीक से बोल भी नहीं पा रहा था। ऐसे में एडिशनल एसपी ने उसे पास की दुकान से चॉकलेट और बिस्किट दिलाकर पहले शांत कराया और फिर बड़े स्नेह से उससे उसके घर का रास्ता पूछने की कोशिश की।

पैदल एक किलोमीटर तक गोद में लेकर खोजते रहे घर
काफी देर तक प्रयास करने के बाद बच्चे ने इशारों में रास्ता बताना शुरू किया। इसी दौरान स्थानीय युवक शिवम और भोला पासवान भी मदद के लिए आगे आए।
एडिशनल एसपी अनिल सोनी उस मासूम को गोद में लेकर करीब एक किलोमीटर तक पैदल चलते हुए भरतपुर मोहल्ले तक पहुंचे।
मां की आंखों में छलक पड़े आंसू
मोहल्ले में पहुंचते ही बच्चे ने अपनी मां को देखते ही पुकारा। तब उसकी पहचान “शौर्य” के रूप में हुई।
काफी देर से अपने बेटे को ढूंढ रही मां ने जब शौर्य को सुरक्षित देखा तो उसकी आंखों से राहत के आंसू छलक पड़े। उसने एडिशनल एसपी का बार-बार आभार जताया।
एडिशनल एसपी अनिल सोनी ने महिला को समझाइश देते हुए कहा कि छोटे बच्चों का विशेष ध्यान रखें और उन्हें इस तरह अकेला सड़क पर न छोड़ें। इसके बाद उन्होंने नन्हे शौर्य के सिर पर प्यार से हाथ फेरा और अपनी ड्यूटी के लिए रवाना हो गए।
जब वर्दी में दिखी इंसानियत
यह घटना केवल एक बच्चे को सुरक्षित घर पहुंचाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस संवेदनशीलता की मिसाल है जो पुलिस की वर्दी के भीतर धड़कती है।
रायगढ़ पुलिस के इस अधिकारी ने यह साबित कर दिया कि खाकी सिर्फ कानून की सख्ती का प्रतीक नहीं, बल्कि मानवता की सबसे मजबूत ढाल भी है।
उस दिन सड़क पर खेलता एक मासूम शायद खतरे से अनजान था, लेकिन एक सजग पुलिस अधिकारी की नजर ने उसे नई जिंदगी दे दी।
कह सकते हैं — उस दिन खाकी ने सिर्फ अपना फर्ज नहीं निभाया, बल्कि एक मां की दुनिया उजड़ने से बचा ली।

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