Thursday, March 12, 2026
Home शिक्षा हाल-ऐ-JSW नहरपाली… “प्रदूषण लोकल के हिस्से,ठेके की मलाई बाहरी के नाम”….कंपनी के कमर्शियल डिपार्टमेंट की भूमिका सवालों के घेरे में…लोकल ठेकेदारों को कम रेट में काम,बाहरी ठेकेदारों को मुंहमांगा रेट…ग्रामीणों का गुस्सा उबाल पर,बैठकों का दौर तेज…चक्काजाम की तैयारी…

हाल-ऐ-JSW नहरपाली… “प्रदूषण लोकल के हिस्से,ठेके की मलाई बाहरी के नाम”….कंपनी के कमर्शियल डिपार्टमेंट की भूमिका सवालों के घेरे में…लोकल ठेकेदारों को कम रेट में काम,बाहरी ठेकेदारों को मुंहमांगा रेट…ग्रामीणों का गुस्सा उबाल पर,बैठकों का दौर तेज…चक्काजाम की तैयारी…

by Surendra Chauhan

रायगढ़। जिले के नहरपाली स्थित जेएसडब्ल्यू प्लांट को लेकर एक बार फिर स्थानीय ग्रामीणों और ठेकेदारों में भारी आक्रोश उभरकर सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट से निकलने वाले भयावह प्रदूषण का लगभग 99 प्रतिशत असर स्थानीय गांवों पर पड़ता है, जबकि जब ठेके और आर्थिक लाभ देने की बारी आती है तो उसका अधिकांश हिस्सा बाहरी ठेकेदारों को सौंप दिया जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति सीधे-सीधे स्थानीय अधिकारों पर कुठाराघात है। इसी वजह से इलाके में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है और अब यह आक्रोश आंदोलन का रूप लेने की ओर बढ़ रहा है।

कमर्शियल विभाग की कार्यशैली पर सवाल
नहरपाली स्थित जेएसडब्ल्यू प्लांट में कमर्शियल विभाग की कार्यशैली को लेकर स्थानीय ठेकेदारों में गहरी नाराजगी है। आरोप है कि कंपनी के अधिकारी बाहरी ठेकेदारों को अधिक तवज्जो देते हैं और उन्हें ऊंची दरों पर काम सौंपते हैं।
वहीं वही काम जब स्थानीय ठेकेदारों को दिया जाता है तो उन्हें बेहद कम दरों पर काम करने के लिए मजबूर किया जाता है।
स्थानीय ठेकेदारों का कहना है कि एक ही काम के लिए बाहरी ठेकेदारों को अधिक दर, जबकि लोकल ठेकेदारों को सबसे कम रेट देना अब कंपनी की एक तरह की व्यवस्था बन चुकी है।
कम रेट और कागजी जाल में उलझे लोकल ठेकेदार
सूत्रों के अनुसार कम रेट के साथ-साथ जटिल कागजी प्रक्रिया और अनावश्यक शर्तों के नाम पर स्थानीय ठेकेदारों को बार-बार अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
इस व्यवस्था से परेशान होकर कई ठेकेदार मजबूरी में कंपनी की शर्तों पर काम कर रहे हैं, जबकि कुछ ठेकेदार इन प्रपंचों से तंग आकर कंपनी के काम से दूरी बनाकर अपने निजी व्यवसाय में लौटने को मजबूर हो गए हैं।
जमीन गई, रोजगार भी दूर
ग्रामीणों का कहना है कि यह वही
परिवार हैं जिनकी जमीन, जल और जंगल उद्योग स्थापित करने और स्थानीय रोजगार देने के वादों के साथ लिए गए थे।
लेकिन अब जब उद्योग पूरी तरह स्थापित हो चुका है, तब स्थानीय लोगों और ठेकेदारों को ही हाशिये पर धकेला जा रहा है।
ग्रामीणों का सब्र टूटने के कगार पर
कमर्शियल विभाग के इस कथित सौतेले रवैये को लेकर ग्रामीणों का सब्र अब जवाब देने लगा है। इलाके में इस मुद्दे को लेकर लगातार बैठकों का दौर शुरू हो चुका है और स्थानीय ठेकेदारों व ग्रामीणों द्वारा आंदोलन की रणनीति तैयार की जा रही है।
चक्काजाम की चेतावनी
सूत्रों के अनुसार यदि जल्द ही इस मामले में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में आंदोलन उग्र रूप ले सकता है। ग्रामीणों ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर बड़े स्तर पर चक्काजाम और विरोध प्रदर्शन किया जाएगा, जिससे उद्योग और प्रशासन दोनों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण बन सकती है।
बाहरी ठेकेदारों पर मेहरबानी, “बड़े खेल” की आशंका
ग्रामीणों का आरोप है कि बाहरी ठेकेदारों को लगातार अधिक दरों पर काम देने और स्थानीय ठेकेदारों को कम रेट में उलझाए रखने की प्रवृत्ति किसी बड़े खेल की ओर इशारा करती है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जेएसडब्ल्यू प्रबंधन और जिला प्रशासन इस बढ़ते असंतोष को गंभीरता से लेते हैं या फिर मामला जल्द ही सड़कों पर आंदोलन और चक्काजाम तक पहुंचता है।

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